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कालसर्प दोष

जातक की जन्म कुंडली में राहू और केतु के बीच सभी ग्रह आते हैं तो काल सर्प दोष होता है एवं राहु और केतु के बिच 6 ग्रह आ जाए, परंतु एक ग्रह बाहर रहे तो आंशिक काल सर्प दोष होता है । कालसर्प दोष को अत्यंत अशुभ योग माना गया है क्योकि शास्त्र के अनुसार यह योग जिस जातक की कुंडली में होता है उस जातक के कार्यों में रुकावट आना, होते होते कार्य का रुक जाना । कालसर्प दोष जन्मकुडली में क्यो आता है ? कालसर्प दोष जातक की जन्म कुडली में इसलिए आता है, क्योंकि कभी सर्पों को कीसी भी प्रकार की क्षती पंहुची हो या किसी प्रकार से सर्प को जाने अनजाने में मारा गया हो आपके एवं आपके कुल द्वारा । यदि कुंडली में कालसर्प दोष रहता है तो पूरे विश्व में सिर्फ दो ही जगह इस दोष की निवृत्ति के लिए उन स्थान पर जाकर पूजन अभिषेक करने से उस दोष की निवृत्ति होती है उन दो स्थानों में से एक स्थान मंगलनाथ मंदिर उज्जैन भी है, जहाँ कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजन अभिषेक एवं सर्पों की स्थापना करने के बाद मोक्ष दायनी क्षिप्रा में विसर्जन किया जाता है । कालसर्प दोष निवारण हेतु निम्न पूजा है- सामान्य कालसर्प दोष पूजा ग्रह शांति कालसर्प पूजन राहु केतु के जाप सहित कालसर्प दोष निवारण पूजन

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