अश्विनी नक्षत्र
अश्विनी नक्षत्र यह नक्षत्र ठीक सिर्फ दिसंबर महीने के पहले ठीक शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह
नक्षत्र 3 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप घोड़े के मुँह जैसा स्वरूप दिखाई देता है मेष राशि अश्विनी नक्षत्र 0 अंश
0 कला से 13 अंश 20 कला तक होता है
अश्विनी नक्षत्र का स्वभाव:
अश्विनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का स्वभाव स्थूलकाय, सुन्दर, चतुर, बुद्धिमान, लोकप्रिय भाग्यवान, बातूनी,
जल्दबाज, भ्रमणप्रिय, कलहप्रिय, अल्प संपत्तिवान, भूसम्पत्ति के लिए चिन्तित, भ्राता से तनावपूर्ण सम्बन्ध |
अश्विनी नक्षत्र व्यवसाय:
अश्विनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक पुलिस , सेना, उद्योग, न्यायालय, जेल, रेलवे में नौकरी, मशीनरी, लौह इस्पात,
तांबा व्यवसाय, अध्यापन, लेखन, योग प्रशिक्षण, शल्य चिकित्सक, घुड़सवार या घोड़ों से सम्बन्धित व्यवसाय ।
इस अश्विनी नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://www.youtube.com/embed/YJYh_V819fI
अश्विनी नक्षत्र रोग:
अश्विनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें सिर में चोट, घाव, वातशूल, मूर्छा, मस्तिष्क में रक्त संचय,
मिर्गी, आधा सीसी का दर्द, पक्षाघात, मस्तिष्क ज्वर, मस्तिष्कीय रक्तस्त्राव, आत्मविस्मृति, अनिद्रा, मलेरिया, चेचक.
राशीश मंगल
• नक्षत्र अंग - शिर• नक्षत्र वृक्ष - केला आर्क धतूरा• नक्षत्र रंग : लाल• नक्षत्र तत्व - वायु• नक्षत्र गणना - शुभ•
नक्षत्र स्वामी केतू ।• नक्षत्र के देवता अश्विनीकुमार • नक्षत्र मंत्र अश्विनीकुमाराभ्यां नमः • वर्ण: क्षत्रिय •
वशय:चतुश्पद • योनि : अश्व • गण: देव • नाड़ी: आदि
नक्षत्र साधना उपासना
अश्विनी नक्षत्र के 4 चरण मेष राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी मंगल:
एकादसी व्रत, भानु सप्तमी का व्रत
द्वितीय चरण का स्वामी शुक्:
हरिवंश पुराण श्रवण पढाई तथा पठन गौ-दान गायत्री मंत्र जप
तृतीय चरण का स्वामी बुध :
हरिवंश पुराण श्रवण पठन गौ-दान
चौथे चरण का स्वामी चंद्रमा :
गायत्री जप हवन सुवर्ण दान
Special Tips:
अश्विनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को अश्विनी मघा और मूला इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना
चाहिए