भरणी नक्षत्र
भरणी नक्षत्र यह नक्षत्र ठीक सिर्फ दिसंबर महीने के दूसरे पक्ष में में रात 9:00 से 11:०० ठीक शिर पर आकाश बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 3 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में त्रिकोण के सामान स्वरूप माना गया है मेष राशि भरणी नक्षत्र 13 अंश 20 कला से 26 अंश 40 कला तक होता है
भरणी नक्षत्र का स्वभाव:
भरणी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का स्वभाव चतुर, प्रसन्न, सत्यवक्ता, नीरोग, साहसी, दृढ़ प्रतिज्ञ, सुखी, धनी, रसिक, मनोरंजन के कार्यों ( संगीत, नाटक, खेलकूद आदि) के प्रति रुझान, धूम्रपान व मद्यपान में रुचि, भाग्यवादी, स्वार्थी, कठोर, निर्दयी, कृतघ्न, चटोरा, इन्द्रिय सुख लिप्त ।
भरणी नक्षत्र व्यवसाय:
भरणी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का व्यवसाय आमोद-प्रमोद, सिनेमा थियेटर, खेलकूद, संगीत, वाद्ययंत्र, ललित कला, विज्ञापन, प्रदर्शनी, रजत आभूषण, रेशम, ऑटोमोबाइल्स, खाद, उद्योग, रेलवे, पशुपालन, पशु चिकित्सा, चाय एवं कॉफी के बागान, होटल व रेस्तरां, न्यायाधीश, अपराध विशेषज्ञ अधिवक्ता, चर्म उद्योग, खाल-हड्डियां, भवन निर्माण, इंजीनियर, शल्य चिकित्सक, रति एवं मातृ रोग विशेषज्ञ, कृषक, नेत्र रोग विशेषज्ञ, चश्मा व्यवसाय, प्लास्टिक, खेलकूल उपकरण, कसाईखाना आदि ।
इस भरणी नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://www.youtube.com/embed/ZBzFiE2y8Es
भरणी नक्षत्र रोग:
भरणी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें सिर या मस्तक पर नेत्रों के निकट चोट, रतिरोग, सूजाक, चर्म रोग, ठंड कम्पन, ज्वर, गर्मी ( सूजाक ) से चेहरा व दृष्टि प्रभावित |
राशीश मंगल
• नक्षत्र अंग -सिर, एवं नेत्र ज्योति• नक्षत्र वृक्ष - केला और अम्ब्ला• नक्षत्र रंग : सफ़ेद• नक्षत्र तत्व अग्नि• नक्षत्र गणना - क्रूर• नक्षत्र स्वामी शुक्र ।• नक्षत्र के देवता यम• नक्षत्र मंत्र यमाय नमः • वर्ण:क्षत्रिय • वशय:चतुश्पद • योनि : गज • गण: मनुष्य • नाड़ी:मध्य
नक्षत्र साधना उपासना
भरणी नक्षत्र के 4 चरण मेष राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी रवि
शिव उपासना मृत्युंजय मंत्र जप और ब्राह्मण भोजन
द्वितीय चरण का स्वामी बुध :
गायत्री मंत्र जप और हवन
तृतीय चरण का स्वामी शुक्र :
ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप
चौथे चरण का स्वामी मंगल :
विष्णु भगवान की उपासना
Special Tips:
भरणी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को भरणी , पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए