पुनर्वसु नक्षत्र फरवरी के आखिर में और मार्च के शुरू में आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 4 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में घर जैसा स्वरूप दिखाई देता है मिथुन राशि, पुनर्वसु नक्षत्र –प्रथम द्वितीय व तृतीय चरण– मिथुन राशि, 20 अंश से 30 अंश तक होता है कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र –चतुर्थ चरण–कर्क राशि 0 अंश से 3 अंश 20 कला होता है
मिथुन राशि, पुनर्वसु नक्षत्र का स्वभाव:
पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का बुद्धिमान, उत्तम स्मरण शक्ति, उचित निर्णय क्षमता, सदाचारी, सत्यभाषी, दानी, आकर्षक, धनी, संतोषी, लोकप्रिय मित्रप्रिय, अन्तःज्ञान युक्त, आलसी ।
कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र का स्वभाव:
कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का उच्च कल्पना शक्ति, ईमानदार, सत्यमार्गी, वफादार, विश्वसनीय, क्षमाशील, उच्च तर्क तथा निर्णय शक्ति, सहानुभूतिप्रद, धनी,
मिथुन राशि, पुनर्वसु नक्षत्र व्यवसाय
पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक । पत्रकार, सम्पादक, प्रकाशक, निरीक्षक, ऑडीटर, कहानी लेखक, साहित्य के अनुवादक, कवि, लेखाकार, न्यायाधीश, इन्जीनियर, प्रवक्ता, सलाहकार, शिक्षक, सचिव, पोस्टमैन, दन्त विषेषज्ञ, उद्घोषक, राजदूत, ऊनी वस्त्र विक्रेता, दुभाषिया, ग्राम प्रधान
कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र व्यवसाय
कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक । चिकित्सक, पुरोहित, पादरी, राजनयिक मौलवी, अर्थशास्त्री, वकील, न्यायाधीश, व्याख्याता, प्राचार्य, व्यापारी, बैंक कर्मचारी, नाविक, यात्रा - व्यवसायी, नर्स, जलप्रदाय विभाग, तरल पदार्थ से सम्बन्धित व्यवसाय | मिथुन राशि, पुनर्वसु नक्षत्र रोग: नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें निमोनिया, प्लूरिसी, कान में सूजन व दर्द, फेफड़ों में कष्ट, घेंघा, क्षयरोग, रक्त विकार, कमर दर्द, सिरदर्द, ज्वर, ब्रोंकाइटिस, हृदय की बाहरी झिल्ली में सूजन।
इस पुनर्वसु नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/Yoo6WOvaYbo?si=z-j_aS6EBMjBXroe
कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र रोग:
कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें क्षय रोग, निमोनिया, कफ-कास, रक्तविकार, बेरी-बेरी, जलशोथ, आमाशय में सूजन, अनियमित भूख, श्वासनली में सूजन, पीलिया।
मिथुन राशि, पुनर्वसु नक्षत्र राशीश बुध,
कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र राशीश चन्द्र
• नक्षत्र अंग – कान, गला, कंधा, फेफड़े। फेफड़े, श्वसनतंत्र, छाती, आमाशय, भोजन नली, अग्नाशय• नक्षत्र वृक्ष बांस है ।• नक्षत्र रंग - यलो• नक्षत्र तत्व - वायु• नक्षत्र गणना - चर• नक्षत्र स्वामी गुरु• नक्षत्र के देवता - अदिति• नक्षत्र मंत्र - ॐ पुनर्वसुभ्यां नमः
पुर्नवसु मिथुन राशि
• वर्ण: सूद्र• वशय: मानव• योनि :मार्जार• गण: देव• नाड़ी: आदि
पुर्नवसु कर्क राशि
• वर्ण: विप्र• वशय: जलचर• योनि :मार्जार• गण: देव• नाड़ी: आदि
नक्षत्र साधना उपासना
पुनर्वसु नक्षत्र –प्रथम द्वितीय व तृतीय चरण– मिथुन राशि चतुर्थ चरण–कर्क राशि में आता है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : मंगल
शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा दान धर्म गायत्री मंत्र जप
द्वितीय चरण का स्वामी : शुक्र
गायत्री मंत्र जप , महामृत्युंजय जप और विष्णु पूजा
तृतीय चरण का स्वामी : बुध
दुर्गा सप्तसती एवं भगवान शिव की पूजा
चौथे चरण का स्वामी :चंद्र
रविवार और सप्तमी का उपवास
Special Tips:
पुनर्वसु नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को पुनर्वसु विशाखा – पूर्वाभाद्रपद - इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए