आश्लेषा नक्षत्र मार्च महीने के आखिर में ठीक शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 5 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप चक्र जैसा स्वरूप दिखाई देता है कर्क राशि आश्लेषा नक्षत्र - 16 अंश 40 कला से 30 अंश तक होता है
आश्लेषा नक्षत्र का स्वभाव:
आश्लेषा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का हाजिर जवाब, उत्तम वक्ता एवं लेखक, विनोदी, अन्य भाषाओं का ज्ञाता, कला, संगीत व साहित्य में रुचि, यात्राप्रिय, अविश्वासी, पापी, कृतघ्न, आलसी, धोखेबाज, कुसंगत, स्वार्थी ।
आश्लेषा नक्षत्र व्यवसाय:
आश्लेषा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक व्यापारी, दलाल, विक्रय प्रतिनिधि, कलाकार, संगीतकार, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार, पत्रकार, लेखक, स्याही व रंग के निर्माता, टाइपिस्ट, लेखाकार, ऑडिटर, दुभाषिया, राजदूत, यात्रा दलाल, गाइड, परिचारिका, नर्स, दाई, ज्योतिषी, गणितज्ञ, जलदाय विभाग, वस्त्र निर्माण इंजीनियर, ठेकेदार, सूत, कागज, पेन, स्टेशनरी, स्याही, चूना का व्यापारी ।
इस आश्लेषा नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/iA5nBm-VY2U?si=qpiwgWjfNvWzJjCP
आश्लेषा नक्षत्र रोग:
आश्लेषा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें –वातरोग, श्वास विकार, जलशोथ, अपच, पीलिया, घबराहट, उन्माद,
राशीश चन्द्र,
• नक्षत्र अंग – फेफड़े, आमाशय, भोजन नली, पित्ताशय, अग्नाशय, यकृत । स्नायु• नक्षत्र वृक्ष नाग केसर और चंदन है ।• नक्षत्र रंग : हरा• नक्षत्र तत्व तीक्ष्ण• नक्षत्र गणना - जल• नक्षत्र स्वामी बुध• नक्षत्र के देवता- सर्प • नक्षत्र मंत्र - ॐ आश्लेषायै नमः • वर्ण : विप्र • वशय : जलचर • योनि : मार्जार • गण : राक्षस • नाड़ी : अंत्य
नक्षत्र साधना उपासना
आश्लेषा नक्षत्र के 4 चरण कर्क राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
पप्रथम चरण का स्वामी : गुरु
सूर्य मंत्र का जप
द्वितीय चरण का स्वामी : शनि
गयत्री मंत्र का जप
तृतीय चरण का स्वामी : शनि
गयत्री मंत्र का जप
चौथे चरण का स्वामी : गुरु
विष्णु पूजन एवं विष्णु उपासना
Special Tips:
आश्लेषा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को आश्लेषा ज्येष्ठा - रेवती इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए