स्वाति नक्षत्र जून महीने में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 1 ही तारा है इसका आकाश में तोरण जैसा स्वरूप दिखाई देता है तुला राशि - 6 अंश 40 कला से 20 अंश तक होता है
स्वाति नक्षत्र का स्वभाव:
स्वाति नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का ईमानदार, विनम्र, न्यायप्रिय, बुद्धिमान, अन्तःज्ञानयुक्त, मधुर व्यवहार युक्त, सहानुभूतिप्रद, व्यापारिक चतुराई, मधु-भाषी, समायोजनप्रिय ।
स्वाति नक्षत्र व्यवसाय:
स्वाति नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक विद्युत उपकरण, ट्यूबलाइट, पंखे, हीटर, कूलर, एक्सरे आदि का निर्माता, ऑटोमोबाइल, यातायात, पर्यटन, संगीत, नाटक, थियेटर, कला, चित्रकारी, सजावट, प्रदर्शनी, वैज्ञानिक, न्यायाधीश, कवि, उद्घोषक, नृतक, फेंसी व हार्डवेयर सामान निर्माता, हलवाई, बेकरी, दूध डेयरी, चमड़े का सामान, रसोइया, नौकरानी, कशीदाकारी, फोटोग्राफी, रेडीमेड गारमेन्ट्स, इत्र, सेन्ट, प्लास्टिक व कांच का निर्माता व व्यापारी ।
इस स्वाति नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/wiOjRWIsiMg?si=q9Sx_3iCMzjF6lbG
स्वाति नक्षत्र रोग:
स्वाति नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें चमड़ी (चर्म) गुरदे, मूत्रनली, मूत्राशय, हार्निया, एपेन्डिक्स (ii) रोग – मूत्ररोग, मूत्रनली में छाले या मवाद, चर्म रोग, कोढ़, श्वेत दाग, बहुमूत्र रोग, गुरदों के रोग ।
राशीश शुक्र
• नक्षत्र अंग – चमड़ी (चर्म) गुरदे, मूत्रनली, मूत्राशय, हार्निया, एपेन्डिक्स• नक्षत्र वृक्ष - अर्जुन है ।• नक्षत्र रंग - ब्राउन• नक्षत्र तत्व - अग्नि• नक्षत्र गणना - शुभ• नक्षत्र स्वामी राहू ।• नक्षत्र के देवता -वायु • नक्षत्र मंत्र - ॐ स्वत्यै नमः • वर्ण : सूद्र • वशय : मानव • योनि : महिस • गण : देव • नाड़ी : अंत्य
नक्षत्र साधना उपासना
स्वाति नक्षत्र के 4 तुला राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : गुरु
विष्णु मंत्र के जप और उपासना
द्वितीय चरण का स्वामी : शनि
तुलसी पूजा दिप दान और गायत्री मंत्र जप
तृतीय चरण का स्वामी : शनि
गायत्री मंत्र जप और हवन
चौथे चरण का स्वामी : गुरु
शालिग्राम की पूजा
Special Tips:
स्वाति नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को आर्द्रा स्वाति – शतभिषा इन तीन नक्षत्र ने कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए