ज्येष्ठा नक्षत्र जुलाई महीने के आखरी पक्ष में ठीक शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 3 तारो से बना हुआ है इसका स्वरुप आकाश में कुण्डल जैसा दिखाई देता है ज्येष्ठा नक्षत्र -वृश्चिक राशि-16 अंश 40 कला से 30 अंश तक होता है
ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वभाव:
ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का विद्वान, कुशल, चतुर, हाजिरजवाब, क्रियात्मक, विद्याभिलाषी, स्फूर्तिवान, निडर, साधनयुक्त परन्तु कटुभाषी, झगड़ालू
ज्येष्ठा नक्षत्र व्यवसाय:
ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक प्रकाशन मुद्रण, स्याही, टंकण कार्य केलक्यूलेटर व केबिल निर्माता, विज्ञापन, सूती वस्त्र उद्योग, पम्पसेट, बॉयलर विक्रेता, रासायनिक इन्जीनियर,बांध, नहर खुदाई, बीमा, चिकित्सा, सेना, नौ सेना, न्यायाधीश, डाक-तार, जेल विभाग।
इस ज्येष्ठा नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://www.youtube.com/live/6Bwe41tgLRY?si=W8Eog3Md_2O-aU-O
ज्येष्ठा नक्षत्र रोग:
ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें श्वेत प्रदर, खूनी बवासीर, रतिरोग, प्रजननांग सम्बन्धी रोग, भुजाओं व कन्धों में दर्द, ट्यूमर
राशीश मंगल
• नक्षत्र अंग – अंडाशय, गर्भाशय, बड़ी आंत, प्रजननांग, मलद्वार• नक्षत्र वृक्ष रीठा है ।• नक्षत्र तत्व - पृथ्वी• नक्षत्र रंग - हरा• नक्षत्र गणना - तीक्ष्ण• नक्षत्र स्वामी - बुध• नक्षत्र के देवता - इंद्रा• नक्षत्र मंत्र - ॐ ज्येष्ठायै नमः • वर्ण: विप्र • वशय: किट • योनि : मृग • गण:राक्षस • नाड़ी:आदि
नक्षत्र साधना उपासना
ज्येष्ठा नक्षत्र के 4 चरण वृश्चिक राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : गुरु
गायत्री मंत्र जप और भूमि दान
द्वितीय चरण का स्वामी : शनि
एकादसी व्रत
तृतीय चरण का स्वामी : शनि
पूर्णिमा व्रत उपवास
चौथे चरण का स्वामी : गुरु
सूर्य गायत्री मंत्र के जप
Special Tips:
ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को आश्लेषा ज्येष्ठा - रेवती इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए