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Budha Mantra Jap Of Graha

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Budha Mantra Jap Of Graha
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बुध ग्रह का महत्व और पूजा

बुध अत्रि गौत्री और मगध देश के स्वामी है । बुध का वर्ण हरा है । उनके चार हाथ मे एक में ढाल, दूसरे में गदा, तीसरे में वरमुद्रा और चौथे में खडग है। शेर पर सवार है। उनके अधिदेवता नारायण है और प्रत्यधिदेवता विष्णु है।

बुध ग्रह का महत्व और पूजा :-

( ॐ ऐम श्रीं श्रीं बुधाय नमः ) ह्रीं बुधाय नमः। मंत्र के जितने जाप होते है उसके दशांश हवन होता है। हवन में बुध के लिए चिचड़ा( अपामार्गी ) समिध का उपयोग होता है। पृथ्वी तत्त्व, देवता विष्णु, नपुंसक, वर्ण श्याम, प्रकृति सौम्य, वाणी पे प्रभुत्व, विद्या का कारक, हरा रंग, कुमार वय, भाग्योदय ३२ वर्ष में , वैश्य जाति, रजोगुणी, शरीर - धातु - चमड़ी, मिश्ररस, दिशा उत्तर, रत्न पन्ना, धातु कांस्य-पित्तल, छिप, शरद ऋतु, अवस्था बाल्य, रोगस्थान हाथ, पग, रोग, पित्तादि विकार, त्रिदोष, भावकारक चौथा और दशम भाव। अष्टोत्तरी दशा १७ वर्ष, जन्मराशि से शुभ गोचर स्थान २,४,६,८,१०,११ । अनिष्ट गोचर स्थान ४,८ और १२ राशि भ्रमणकाल १ मास (२२ से २३ दिवस), राशि स्वामी आष्लेश,ज्येष्ठा और रेवती। स्वगृही राशि मिथुन, कन्या। मूल त्रिकोण राशि कन्या, उच्च राशि कन्या, नीचराशि मीन, अस्त राशि धन और मीन। बुध के पर्याय नाम :- बोधन, सौम्य, चंद्रपुत्र, कुमार, इन्द्रज(इंदुज), सोमज, प्रभासुत वगेर। बुध के मित्र ग्रह में सूर्य, शुक्र, राहु। बुध ग्रह के समग्रह मंगल, गुरु शनि है और चंद्र की गिनती शत्रु में होती है। बुध ग्रह अथर्ववेद का स्वामी है। बुध ग्रह की जप संख्या ३६,000 है। बुध ग्रह का नाम मंत्र है :- ॐ बुधाय नमः। बुध ग्रह का स्थान विहार (एकांत जगह), क्रीड़ास्थान गिना जाता है। वह युवराज है। वाणी और बुद्धि का कारक है। बुध ग्रह शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ और अशुभ ग्रह के साथ हो तो अशुभ गिना जाता है। वह शूद्रवर्ण और नपुंसक है। बुधग्रह के विषय में पढ़ना-पढ़ाना, भाषण देना, प्रकाशन करना, पुस्तक लिखना, छापना, व्यापर, दलाली, कमीशन का काम, शरफ़ी काम, बैंकिंग, पत्रव्यवहार, डाक,टेलीफोन, कम्प्यूटर, रेडियो, टीवी, संदेशव्यवहार के सभी कार्य और सभी प्रकार के वहनव्यवहार के साथ बुध संलग्न है । वकालत, तथा दुभाषी का कार्य भी बुध में ही समाहित है। वह निखलास और बातूनी होता है ,स्त्री के साथ सम्बन्ध रखने का शौक़ीन होता है। समय कम होता है। स्मरणशक्ति तीक्ष्ण होती है। बुध ग्रह का ज्योतिष, तत्त्वज्ञान, गणितशास्त्र, राजनीति, काव्य-विज्ञान और व्यापर का अच्छा ज्ञान होने का सम्बन्ध है। बुध ग्रह की शुभ असरो में :- वाणी पर आधिपत्य प्राप्य है, व्यापर धंधे में कुशाग्र बुद्धि के, वाद-विवाद के शौखिन, तर्कशास्त्र में निपुण, सभी बातों में अग्र होते है।

बुध ग्रह का महत्व और पूजा

तत्त्वपृथ्वीस्वभावसम
गुणरजसंज्ञाशुभ
लिंगनपुंसकवर्णजातिवैश्य
प्रकृतिवात-पित्त, कफकारकमामा, शिल्प
धातुसारत्वचा, रक्तअधिष्ठातावाणी, बुद्धि
पदवीयुवराजशरीर-चिह्नकान, पैर, हृदय
दिशाउत्तरधातुसोना, कांसा
रत्नपन्नाधारण-समयकिसी भी समय
स्वामीविष्णुसजल-शुष्कसजल
शुभ भावप्रथम भावभाव के कारकचतुर्थ भाव प्रथम भाव
स्थानक्रीडास्थानऋतुशरद्
मित्र ग्रहसूर्य शुक्रसम ग्रहमंगल गुरु शनि
शत्रु ग्रहचन्द्रउच्च राशिकन्या
नीच राशिमीनमू.त्रि. राशिकन्या
महादशा१७ वर्षवक्री-मार्गीवक्री/मार्गी
वृक्षअपामार्गदृष्टिसप्तम
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