इस योग में उत्पन्न व्यक्ति देखने में सुंदर, सुखी, गुणनिधि, धीर, धार्मिक, समदर्शी, विश्वासी, अकर्मण्य, लंबे शरीर वाला, खुश और थोड़ा धनवान होता है |
जातक का व्यक्तित्व उत्कृष्ट, स्नेही वचन बोलने वाला, अच्छी स्मृति वाला, धीमी गति, सात्विक स्वभाव, खुश, समृद्ध, उदार व प्रिय होगा | यह फल शुभ ग्रहों के अनुसार पाप ग्रह हो तो फल विपरीत होगा |
1) सातवें भाव में बुध अकेला नपुंसकता देता है। कन्या लग्न होने पर प्रायः विवाह शीघ्र होता है।
2) कर्क और कन्या और धनु लग्न में "बुध"होने पर जातक ज्योतिष, डॉक्टर, लेखक और न्यायाधीश जैसे क्षेत्र से जुड़ा होता है।
3) यदि द्वितीय स्थान में बुध हो और तीसरे स्थान में शुक्र हो, लेखनी सुंदर होती है, स्मरण शक्ति तेज होती है, ज्योतिष शास्त्र से जुड़ा होता है। आयु के 24-30 और 36 वर्ष में भाग्य उदय होने के योग रहते हैं।
4) तृतीयेश बुध के साथ हो तब गले का रोग होता है।
5)मिथुन लग्न में बुध, सूर्य चंद्र के साथ हो तो चर्म रोग की संभावना रहती है।
6)द्वितीयेश बुध का पाप प्रभाव में होना जातक में घर से भागने की प्रवृत्ति पैदा करता है।
7)तृतीय बुध का प्रभाव में होना अकाल मृत्यु का संकेत देता है।
8)पंचमेश और अष्टमेश बुध शुभ प्रभाव में बलवान हो तो शेयर सट्टा से व पैतृक सम्पत्ति से लाभ होता है। बुध निर्बल और पाप प्रभाव में हो तो धन हानि होनें के योग बनते हैं।
9)मिथुन राशि में बुध हो तृतीय भाव और भावेश पीड़ित हो तब स्वास से संबंधित रोगों की संभावना रहती है।
10)कन्या राशि में बुध और शष्ठ भाव और भावेश पीड़ित हो तब कब्ज, टाइफाइड, हर्निया और आंत्रशोथ का रोग होने की संभावना रहती है।
11) कन्या लग्न में सप्तम भाव में बुध विवाह में विलंब होने के योग बनाता है।
12)बारहवें भाव में बुध जातक कों अधिक व्यय करने वाला, ज्ञानी और चतुर बनाता है।