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पुष्य नक्षत्र
पुष्य नक्षत्र मार्च महीने में ठीक शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 5 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप बाण जैसा स्वरूप दिखाई देता है कर्क राशि पुष्य नक्षत्र - 3 अंश 20 कला से 16 अंश 40 कला तक होता है
पुष्य नक्षत्र का स्वभाव:
पुष्य नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक जनप्रिय, नियमपालक, व्यवस्थाप्रिय, धनी, चतुर। सत्वगुणी परोपकारी ईश्वरभक्त नीतिमान सर्वसुखि उच्चविचार रखने वाला और पिता को प्रिय मानाने वाला होता है
पुष्य नक्षत्र व्यवसाय:
पुष्य नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक उत्खनन, तेल, पेट्रोल, कोयला, पेट्रोल पम्प, वन विभाग, कृषि, कुआं, नहर, खाई, तालाब, सुरंग की खुदाई एवं निर्माण, शमशान या कब्रिस्तान में रात्रि में चौकीदारी, रात्रि के अन्य कार्य, जेलर व न्यायाधीश, भूमिगत कार्य एवं जलीय पदार्थों से सम्बन्धित व्यवसाय |
इस पुष्य नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें

 

 


पुष्य नक्षत्र रोग:
पुष्य नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें क्षय, कैन्सर, पीलिया, पायरिया, गजचर्म (एग्जीमा), स्कर्वी, आमाशय में छाले, श्वासनलिका में घाव, पित्ताशय में पथरी
राशीश चन्द्र
• नक्षत्र अंग फेफड़े, आमाशय, पसलियां• नक्षत्र वृक्ष पीपल है ।• नक्षत्र रंग - काला• नक्षत्र तत्व -अग्नि• नक्षत्र गणना - शुभ• नक्षत्र स्वामी शनि• नक्षत्र के देवता - बृहस्पति • नक्षत्र मंत्र = ॐ पुष्याय नमः • वर्ण: विप्र • वशय: जलचर • योनि :मेष • गण: देव • नाड़ी: मध्य
नक्षत्र साधना उपासना
पुष्य नक्षत्र के 4 चरण कर्क राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : सूर्य
गायत्री मंत्र जप
द्वितीय चरण का स्वामी : बुध
गायत्री मंत्र जप
तृतीय चरण का स्वामी :शुक्र
गायत्री मंत्र जप और गौ-दान
चौथे चरण का स्वामी : मंगल
महामृन्तुन्जय जप
Special Tips:

पुष्य नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को पुष्य अनुराधा उत्तराभाद्रपद इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए |

https://youtu.be/7-OD7tcwcp4