आर्द्रा नक्षत्र फरवरी महीने में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 3 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप मणि स्वरूप दिखाई देता है मिथुन राशि आर्द्रा नक्षत्र 6 अंश 40 कला स 20 अंश तक,
आर्द्रा नक्षत्र का स्वभाव:
आर्द्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का साहित्य में रुचि, कृतघ्न, असत्यवादी, चोर, दुष्ट, पापी,बदमाश, मद्यपानप्रिय, निन्दनीय ।
आर्द्रा नक्षत्र व्यवसाय:
आर्द्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक । व्यापार, पुस्तक विक्रेता, डाक-तार विभाग, यातायात, लेखन, प्रकाशन एवं विज्ञापन, अनुसंधानकर्ता, आविष्कर्ता, दवा विक्रेता, भौतिकी एवं सांख्यिकी विभाग, भविष्यवक्ता, हस्तरेखा, हस्तलेख एवं हस्ताक्षर विशेषज्ञ, कारीगर, पुलिस या सेना में नौकरी, तांत्रिक, ओझा, जादूगर |
इस आद्रा नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/RyrASRIdak4?si=MSg85MTfO08C0ZA3
आर्द्रा नक्षत्र रोग:
आर्द्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें गले में खराबी, गलफेड़े, अस्थमा (दमा), सूखी खांसी, गलघोटू, श्वास के रोग, कान के रोग
राशीश बुध
• नक्षत्र अंग - नक्षत्र अंग गला, भुजाएं, कन्धे, कान ।• नक्षत्र वृक्ष - आम, बेल• नक्षत्र रंग : लाइट ग्रीन• नक्षत्र तत्व - जल• नक्षत्र गणना - तीक्ष्ण• नक्षत्र स्वामी - राहू• नक्षत्र के देवता - रूद्र• नक्षत्र मंत्र - आर्द्रायै नमः • वर्ण:सूद्र • वशय:मानव • योनि :श्वान • गण: मनुष्य • नाड़ी:आदि
नक्षत्र साधना उपासना
आर्द्रा नक्षत्र के 4 चरण मिथुन राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : गुरु
गायत्री मंत्र जप
द्वितीय चरण का स्वामी : शनि
मंत्र जप और दान
तृतीय चरण का स्वामी : शनि
गायत्री मंत्र जप महामंत्रुंजय जप
चौथे चरण का स्वामी : गुरु
गायत्री मंत्र जप दान और गौ-दान
Special Tips:
आर्द्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को आर्द्रा स्वाति – शतभिषा इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए