मघा नक्षत्र अप्रैल महीने में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 5 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप घर जैसा स्वरूप दिखाई देता है मघा नक्षत्र सिंह राशि–0 अंश से 13 अंश 20 कला, राशीश तक होता है
मघा नक्षत्र का स्वभाव:
मघा नक्षत्र का स्वभाव: मघा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का प्रभावशाली व्यक्तित्व, उत्साही, उत्तरदायी, अधिकारपूर्ण, शक्तिशाली, उत्तम खिलाड़ी, परोपकारी, विश्वसनीय, निर्भीक, महत्वाकांक्षी, धनी, अग्रजभक्त परन्तु मुंहफट, जल्दबाज, झगड़ालू, आत्मरक्षक, क्रोधी, घमण्डी, निर्लज्ज, कामुक ।
मघा नक्षत्र व्यवसाय:
मघा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक उद्योगों का ठेकेदार, रासायनिक दवा उत्पादक, अपराध विशेषज्ञ, रक्षासेवा, शल्य चिकित्सक, चिकित्सा विभाग, सस्ते व नकली ( इमिटेशन ) गहनों के निर्माता, विद्युत पॉलिश, आयुध शस्त्र निर्माण |
इस मघा नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/-qle_7hVOpg?si=Ff8_egQ_vj0K7r7w
मघा नक्षत्र रोग:
मघा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें — हृदयाघात, पीठ, दर्द, मेरुरज्जु की झिल्ली में सूजन, हैजा, दिल धड़कना, मूर्च्छा, किडनी में पथरी, त्रिदोष, मानसिक रोग
राशीश सूर्य
• नक्षत्र अंग – हृदय, पीठ मेरुरज्जु, प्लीहा, महाधमनी ।• नक्षत्र वृक्ष बड़ है ।• नक्षत्र तत्व - अग्नि• नक्षत्र रंग - गुलाबी• नक्षत्र गणना - कुर• नक्षत्र स्वामी केतू• नक्षत्र के देवता - पितृ• नक्षत्र मंत्र - ॐ मघायै नम • वर्ण: क्षत्रिय • वशय:वनचर • योनि : मूषक • गण: राक्षस • नाड़ी: अंत्य
नक्षत्र साधना उपासना
मघा नक्षत्र के 4 चरण सिंह राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : मंगल
गायत्री मंत्र जप हरिवंश पुराण पठन
द्वितीय चरण का स्वामी : शुक्र
गायत्री मंत्र जप
तृतीय चरण का स्वामी : बुध
गौ-दान तिल दान
चौथे चरण का स्वामी : चंद्र
गायत्री मंत्र जप और भूमि दान
Special Tips:
मघा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को अश्विनी मघा और मूला इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए