पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र अप्रैल महीने में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 2 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप चारपाई जैसा दिखाई देता है सिंह राशि पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र — 13 अंश 20 कला से 26 अंश 40 कला तक होता है
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का स्वभाव:
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का सत्यभाषी, ईमानदार, सचेत, मिष्ठभाषी, संगीत, नृत्य, नाट्यकला, चित्रकारी, काव्यकला, ललित कला में रुचि, आकर्षक व्यक्तित्व, दयालु, ऐशो-आराम व उत्तम वस्त्रादि प्रिय, रत्नों का शौकीन ।
इस पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/HBk4pkkgwXg?si=chMXM6vboxDr_GBI
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व्यवसाय:
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक राजकीय नौकरी, यातायात, रेडियो, संगीत, सिनेमा, थियेटर, होटल, रेस्तरां, कैन्टीन आदि से सम्बन्धित व्यवसाय, सूत, शहद, नमक, ऑटोमोबाइल्स का व्यापार, संग्रहालय, एन्टीक्स ( पुरानी कलात्मक वस्तुओं) का व्यापार, खेलकूद, पशुपालन, पशु चिकित्सा, खाल, हड्डी व चमड़े का व्यापार, रतिरोग विशेषज्ञ, शिक्षक, शिक्षाविद, चश्मे के कांच व सिगरेट के निर्माता, जेल व कन्या विद्यालय में नौकरी, राजस्व विभाग, स्त्री रोग विशेषक्ष एवं शल्य चिकित्सक।
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रोग:
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें – सन्तान हानि, गर्भपात, प्यार में धोखा खाने अथवा अन्य हानि से हृदयाघात, हृदय रोग, हृदय में सूजन, वाल्व में खराबी, मेरुदण्ड में बल पड़ना, रक्ताल्पता, रक्तचाप, नाड़ी दोष, टांगों में दर्द, टखने में सूजन।
राशीश सूर्य
• नक्षत्र अंग – हृदय, मेरुरज्जु ।• नक्षत्र वृक्ष ढाक है ।• नक्षत्र तत्व - अग्नि• नक्षत्र रंग - सफ़ेद• नक्षत्र गणना - मिश्रगुणी• नक्षत्र स्वामी शुक्र ।• नक्षत्र के देवता - भृगु• नक्षत्र मंत्र - ॐ पूर्वाफाल्गुनीभ्यां नमः • वर्ण: क्षत्रिय • वशय: वनचर • योनि : मूषक • गण: मनुष्य • नाड़ी: मध्य
नक्षत्र साधना उपासना
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के 4 चरण सिंह राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : सूर्य
गायत्री मंत्र जप
द्वितीय चरण का स्वामी : बुध
गायत्री मंत्र जप और उपासना
तृतीय चरण का स्वामी : शुक्र
गायत्री मंत्र जप , हवन और गौ-दान
चौथे चरण का स्वामी : मंगल
गायत्री मंत्र जप और जल दान
Special Tips:
पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को भरणी - पूर्वाफाल्गुनी पूर्वाषाढ़ा इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए |