हस्त नक्षत्र मई महीने में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 5 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप हाथ के पंजो जैसा स्वरूप दिखाई देता है कन्या राशि हस्त नक्षत्र 10 अंश से 23 अंश 20 कला तक होता है
हस्त नक्षत्र का स्वभाव:
हस्त नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का उत्साही, उद्यमी, वेदज्ञ परन्तु लापरवाह, अभिमानी, झूठा, मद्यप्रिय, वाचाल, पाखण्डी, झगड़ालू, ढीठ, निर्लज्ज, चोर, डाकू। मन्दाग्नि, अफारा,
हस्त नक्षत्र व्यवसाय:
हस्त नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक –व्यापारी, विक्रय कार्य, डाक-तार विभाग, संदेशवाहन, जलयान, • सूती वस्त्र व सूत उद्योग, पुल, बांध, नहर व सुरंग निर्माता, स्याही व रंग निर्माता, कलाकार, चित्रकार, राजनयिक, राजदूत, वकील, आयातक-निर्यातक ।
इस हस्त नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/QsPMgE8PIJw?si=MNKJ6EptKiDVZNd7
हस्त नक्षत्र रोग:
हस्त नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें — गैस बनना, पेट दर्द, आंतों में रुकावट व सूजन, एन्जाइम्स हैजा, आन्त्र ज्वर, पेचिश, श्वास रोग, आंतों में कीड़े, स्नायु शूल, उन्मा
राशीश बुध
• नक्षत्र अंग – आंतें, स्त्रावी ग्रन्थियां,• नक्षत्र वृक्ष रीठा है ।• नक्षत्र तत्व - वायु• नक्षत्र रंग - लाल• नक्षत्र गणना - सत्वगुणी• नक्षत्र स्वामी - चन्द्र• नक्षत्र के देवता - सूर्य• नक्षत्र मंत्र - ॐ हस्ताय नमः • वर्ण: वैश्य • वशय:मानव • योनि : महिष • गण: देव • नाड़ी: आदि
नक्षत्र साधना उपासना
हस्त नक्षत्र के 4 चरण कन्या राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : मंगल
गायत्री मंत्र और विधि पूर्वक हवन
द्वितीय चरण का स्वामी: शुक्र
शिव पूजा या शिव मंत्र का जप
तृतीय चरण का स्वामी : बुध
गायत्री मंत्र या तो जल दान
चौथे चरण का स्वामी : चंद्र
गायत्री मंत्र या सूर्य उपासना
Special Tips:
हस्त नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को रोहिणी - हस्त - श्रवण इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए