कन्या राशि चित्रा नक्षत्र प्रथम व द्वितीय चरण - कन्या राशि, 23 अंश 20 कला से 30 अंश तक होता है चित्रा - तृतीय व चतुर्थ चरण तुला राशि, 0 अंश से 6 अंश 40 कला तक होता है
कन्या राशि चित्रा नक्षत्र का स्वभाव:
चित्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का सुन्दर, परिश्रमी, दूरदर्शी, उत्साही, वाक्पटु, निडर, साहसी, महत्वाकांक्षी, विद्वान, विनोदी परन्तु क्षणिक रुष्ट, तर्कप्रिय, अधीर, चिड़चिड़ा।
तुला राशि, चित्रा नक्षत्र का स्वभाव:
चित्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का महत्वाकांक्षी, उच्च विचार, साहसी, दूरदृष्टि, सूझबूझ, आदर्श स्वभाव, विज्ञान प्रेमी, उत्तम रुचियां, अन्तःज्ञान युक्त ।
कन्या राशि चित्रा नक्षत्र व्यवसाय:
चित्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक प्रकाशन, लेखन मुद्रण, भवन ठेकेदार, दलाल, यातायात पुलिस, रक्षा, सेना, बिक्रीकर, आयकर, राजस्व, वित्त विभाग, उद्योग, विद्युत, खान, मैकेनिक, इन्जीनियर, जेल विभाग, चिकित्सा, अपराध विशेषज्ञ, फिंगर प्रिन्ट विशेषज्ञ, लेखाकार, चित्रकार, बुनकर, इत्र विक्रेता
तुला राशि, चित्रा नक्षत्र व्यवसाय:
चित्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक वकील, शल्य चिकित्सक, वैज्ञानिक, दार्शनिक, धर्मप्रधान, व्यापार, सेना - रक्षा विभाग, उद्योग, व्यापारिक साझेदारी, ठेकेदार, मुद्रणालय, कलात्मक विज्ञापन, सजावट विशेषज्ञ, इत्र, तेल, पाउडर के निर्माता व व्यापारी, वैवाहिक दलाल, खेलकूद, संगीत के वाद्य यंत्रों के निर्माता व व्यापारी, सूक्ष्मदर्शी, रेडियो, टेलीविजन, टेपरिकार्ड, दूरदर्शी आदि का व्यापारी, दर्जी, लेडी डॉक्टर, शल्य चिकित्सक, सिगरेट, सूंघनी, तेल-पेट्रोल के विक्रेता ।
इस चित्रा नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/1wjS7o1t6Co?si=btQwHELi7NJjOwNH
कन्या राशि चित्रा नक्षत्र रोग:
चित्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें – पेट में घाव, तीव्र दर्द, कीड़े, पेट में खुजली, टांगों में दर्द, कीड़ों, सर्पों व जंगली जानवरों द्वारा काटने के घाव, हैजा, मूत्रविकार, पथरी ।
तुला राशि, चित्रा नक्षत्र रोग:
चित्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें गुरदे (किडनी) व ब्लेडर में सूजन, बहुमूत्र रोग, पथरी, सिरदर्द, मस्तिष्क ज्वर, कमर दर्द, लू
कन्या राशि चित्रा नक्षत्र राशीश बुध
तुला राशि चित्रा नक्षत्र राशीश शुक्र
• नक्षत्र अंग – उदर, गर्भाशय, कोख – यकृत, हर्निया, एपेन्डिक्स ।• नक्षत्र वृक्ष बेल है ।• नक्षत्र रंग- लाल• नक्षत्र तत्व - वायु• नक्षत्र गणना - उग्र• नक्षत्र स्वामी - मंगल• नक्षत्र के देवता - त्वष्टा• नक्षत्र मंत्र - ॐ चित्रायै नमः
चित्रा कन्या राशि
• वर्ण: वैश्य • वशय: मानव • योनि : व्याघ्र • गण: राक्षस • नाड़ी: मध्य
चित्रा तुला राशि
• वर्ण: सूद्र • वशय: मानव • योनि : व्याघ्र • गण: राक्षस • नाड़ी: मध्य
नक्षत्र साधना उपासना
चित्रा नक्षत्र प्रथम व द्वितीय चरण - कन्या राशि, - तृतीय व चतुर्थ चरण तुला राशि,में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : रवि
विष्णु उपासना
द्वितीय चरण का स्वामी : बुध
एकादशी व्रत
तृतीय चरण का स्वामी : शुक्र
शिव उपासना
चौथे चरण का स्वामी : मंगल
गायत्री मंत्र का जप
Special Tips:
चित्रा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को मृगशिरा - चित्रा धनिष्ठा इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए