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विशाखा नक्षत्र जुलाई महीने के पहले पक्ष में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 4 तारो से बना हुआ है इसका स्वरुप आकाश में प्रवाल जैसा दिखाई देता है तुला राशि विशाखा नक्षत्र –प्रथम द्वितीय व तृतीय चरण–तुला राशि 20 अंश से 30 अंश तक होता है वृश्चिक राशि विशाखा नक्षत्र - चतुर्थ चरण- वृश्चिक राशि 0 अंश से 3 अंश 20 कला तक होता है

तुला राशि विशाखा नक्षत्र का स्वभाव:

विशाखा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का आकर्षक व्यक्तित्व, मधुर व्यवहार, विनम्र, ईश्वर भक्त, दयालु, उदार, सत्यमार्गी, न्यायप्रिय, बुद्धिमान, सभ्य एवं सुसंस्कृत।

वृश्चिक राशि विशाखा नक्षत्र का स्वभाव:

विशाखा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक प्रभावशाली, उत्साही, सम्मानित, कुलीन, ईमानदार, हितैषी, निष्कपट, स्वच्छन्द, दयालु, अतिउदार, स्पष्टवक्ता, अतिव्ययी, तर्कप्रिय

तुला राशि विशाखा नक्षत्र व्यवसाय:

विशाखा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक – यात्रा दलाल, पर्यटन विभाग, विदेशियों से सम्पर्क द्वारा लाभ, जल एवं वायु यात्रा, धावक, भवन ठेकेदार, विदेशी व्यापार, फल, बागान, साझेदारी, कर एवं राजस्व विभाग, चलचित्र, विज्ञापन, अभिनय, खान, रत्न, इत्र, प्रकाशक,सम्पादक, समालोचक, वैद्य, न्यायाधीश, आडीटर, व्याख्याता, प्राचार्य ।

वृश्चिक राशि विशाखा नक्षत्र व्यवसाय:

विशाखा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक बीमा, बैंक व्यवसाय, न्यायाधीश, अपराध विशेषज्ञ, रसायन एवं दवा निर्माण एवं विक्रय, भूमि भवन व कृषि भूमि से सम्बन्धित व्यवसाय, उद्योग, बन्दरगाह

इस विशाखा नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें

https://youtu.be/S9AFGLNu5dk?si=sqU4qAnhWC4EXF41

तुला राशि विशाखा नक्षत्र रोग:

विशाखा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें डायविटीज, बेहोशी, गुरदे के रोग, गुरदे में मवाद, इन्सुलिन की कमी,चक्कर आना।

वृश्चिक राशि विशाखा नक्षत्र रोग:

विशाखा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें गर्भाशय के रोग, प्रोस्टेट वृद्धि, मूत्ररोग, अधिक रक्तस्त्राव, गुरदे में पथरी, घाव व मवाद, नकसीर, जलोदर

तुला राशि विशाखा राशीश शुक्र

वृश्चिक राशि विशाखा राशीश मंगल

• नक्षत्र अंग – मूत्राशय, मूत्रनली, गर्भाशय एवं अन्य प्रजननांग, मलाशय, पौरुष ग्रन्थि ( प्रोस्टेट ग्लेण्ड ) -पेट का निचला भाग, गुरदे, अग्नाशयी ग्रन्थियां• नक्षत्र वृक्ष नीम है ।• नक्षत्र रंग - यलो• नक्षत्र तत्व - वायु• नक्षत्र गणना - अशुभ• नक्षत्र स्वामी - गुरु• नक्षत्र के देवता - इन्द्राग्नि • नक्षत्र मंत्र - ॐ विशाखाभ्यां नमः

विशाखा वृश्चिक राशि

•वर्ण : विप्र •वशय : किट •योनि : व्याघ्र •गण : राक्षस •नाड़ी : अंत्य

विशाखा तुला राशि

•वर्ण : सूद्र •वशय : मानव •योनि : व्याघ्र •गण : राक्षस •नाड़ी : अंत्य

नक्षत्र साधना उपासना

विशाखा नक्षत्र प्रथम द्वितीय व तृतीय चरण–तुला राशि चतुर्थ चरण- वृश्चिक राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है

प्रथम चरण का स्वामी मंगल:

हर महीने की शिवरात्रि का उपवास

द्वितीय चरण का स्वामी शुक्:

गायत्री मंत्र और जातवेदसे मंत्र का जप

तृतीय चरण का स्वामी बुध :

सूर्य मंत्र का जप , तिल , तूप , मध् , चावल का हवन

चौथे चरण का स्वामी चंद्रमा :

रविवार कप सूर्य पूजा एवं सूर्य उपासना

Special Tips:

विशाखा नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को पुनर्वसु विशाखा – पूर्वाभाद्रपद इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए