मूल नक्षत्र ऑगस्ट महीने के पहले पक्ष में शिर पर आकाश में रात 9:00 से 11:00 बजे दिखाई देता है यह नक्षत्र 11 तारो से बना हुआ है इसका आकाश में स्वरुप सिंह की पुंछ जैसा दिखाई देता है धनु राशि मूल नक्षत्र 0 अंश से 13 अंश 20 कला होता है
मूल नक्षत्र का स्वभाव:
मूल नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक का दयालु, उदार, सम्मानित, क्षमाशील, दानी, आशावादी, न्यायप्रिय, स्नेहिल, धनी, प्रसन्नचित्त, परोपकारी, प्रफुल्लित, धर्मपरायण, सामाजिक कार्यकर्ता, श्रद्धा का पात्र, अंधविश्वासी।
मूल नक्षत्र व्यवसाय:
मूल नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक व्यवसाय–वेदज्ञ, ज्योतिषी, पुरोहित, मौलवी, पादरी, कथावाचक, शिक्षक, राजदूत, सचिव, दुभाषिया, चिकित्सक, वैद्य, जड़ी-बूटी व औषधि विक्रेता, सलाहकार, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, न्यायाधीश, सलाहकार, राजनेता, सम्पादक, ग्राम मुखिया।
इस मूला नक्षत्र की जानकारी वीडियो के रूप में देखें
https://youtu.be/UTSp7Mjcbuk?si=6tfZtM0TkzgkohvQ
मूल नक्षत्र रोग:
मूल नक्षत्र में जन्म धारण करने वाला जातक के जीवनमें कटिवात, गठिया, कमर दर्द, श्वास रोग, न्यून रक्तचाप, मतिभ्रम ।
राशीश गुरु
• नक्षत्र अंग – कूल्हे, जांघें, उरु अस्थियां, नितम्ब अस्थियां, साइटिक तंत्र• नक्षत्र वृक्ष राल का पेड़ है।• नक्षत्र तत्व - जल• नक्षत्र रंग - लाइट ब्लैक• नक्षत्र गणना - तीक्षण• नक्षत्र स्वामी - केतू• नक्षत्र के देवता - निऋति• नक्षत्र मंत्र - ॐ मुलाय नमः • वर्ण: क्षत्रिय • वशय: मानव • योनि : श्वान • गण: राक्षस • नाड़ी:आदि
नक्षत्र साधना उपासना
मूल नक्षत्र के 4 चरण धनु राशि में आते है इस चरण के अनुशार साधना उपासना करने से अच्छा लाभ प्राप्त होता है
प्रथम चरण का स्वामी : मंगल
गायत्री मंत्र और महामंत्रुजय मंत्र जप
द्वितीय चरण का स्वामी : शुक्र
शिव उपासना और शिव मंत्र के जप
तृतीय चरण का स्वामी : बुध
गायत्री मंत्र और गौ-दान
चौथे चरण का स्वामी : चंद्र
महालक्मी मंत्र और गौ-दान
Special Tips:
मूल नक्षत्र में जन्म धारण करने वाले जातक को अश्विनी - मघा - मूल इन तीन नक्षत्र में कोई भी अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए