केतु जातक के मोक्ष का कारक होता है।
विशेषतया बारहवें भाव में केतु मुक्ति प्रदान करता है।
शास्त्रों के अनुसार "कुजवत केतु" अर्थात नैसर्गिक रूप से केतु मंगल के समान फल देता है।
केतु किसी भी भाव में स्वग्रही ग्रह के साथ बैठा हो तो वह उस भाव और साथी ग्रह के प्रभाव तथा शुभ-अशुभ फल में चार गुणा वृद्धि कर देता है।
1) स्थिति – असुर
2) दृष्टि – खुद की स्थिति से 5 वीं , 7 वी और 9 वीं
3) किसी भी राशि का स्वामी नहीं है। लेकिन वह खुद की दशा के दौरान भाव जहां बैठते हैं, उस भाव के स्वामी की तरह व्यवहार करते हैं।
4) उच्च राशी – धनु राशि
5) मूल त्रिकोना राशि – मीन राशि और वृश्चिक अपना घर है।
6) मित्रता – मंगल ग्रह के समान है। लेकिन सूर्य और चंद्रमा केतु का शत्रु विचार है।
7) वश्य -बहुपद प्राणी
8) वर्ण- मल्लेचछ
9) दिशा-दक्षिण पश्चिम
10) दूरी- कम दूरी( सात योजन)
11) शरीर के अंग- पैर
12) आकार| – पोल पर एक ध्वज की तरह
13) प्रकृति- स्वाभाविक रूप क्रूर
14) हाइट्स – लंबा
15) उदय विधि- पृष्ठोदय
16) झलक – ऊपर की ओर नजर
17) गुण – तामसिक (तमो)
18) लिंग – नपुंसक
20) संबंध – पैतृक दादा- दादी
21)आयु- परिपक्वता उम्र 48 साल,
आयु अवधियों-69-108,
व्यक्तिगत आयु- वृद्ध पुरुष लगभग100 वर्ष का
22)मनोविज्ञान – सार्वभौमिक,अड़ियल, सनकी, कट्टरता, विस्फोटकता, हिंसा, भावनात्मक तनाव, अनैतिकता,आवेग,आध्यात्मिकता,त्याग, धोखाधड़ी से पीड़ित,दर्द ,दिमाग को केन्द्रित करना
23) स्थान- मंगल के समान , आध्यात्मिक जगह, जलीय जगह, भावनात्मक जगह, मानसिक उपचार केजगह,
24) पेशा- मंगल के समान, आध्यात्मिक ज्ञान से संबंधित नौकरियों, दार्शनिक, मंदिर और अन्य काम में पुजारी के रूप में, तथा अपने भाव जहाँ पर विराजमान हों
25) केतु भीतर के सत्य को पता उजागर करने वाले ग्रह है।
26) केतु कड़वे/कठोर सच्चाई का प्रतिक है।
27) केतु अध्यात्म का प्राकृतिक कारक हैं।
28) केतु भौतिकवादी (संसारिक सुख) दुनिया से अलगाववाद का प्रतिनिधित्व करते है।
29) केतु मे भीतरी की आत्म ज्ञान में वृद्धि करने की शक्ति है।
30) केतु किसी भी बात की ओर एकाग्रता की शक्ति देने वाला ग्रह है।
31) यह हमेशा बोला जाता है कि केतु मंगल ग्रह जैसे है इस का मुख्य उद्देश्य केतु के क्रूर व्यवहार को मंगल ग्रह के समान प्रदर्शित करना है।
32) दंड विधी – केतु विधि बहुत ही खतरनाक है। भयानक कष्ट जो दर्द से भरपूर होता है।
33) केतु अपने परिणामों को बहुत जल्द देता है।
34) रोगों – हिस्टीरिया, महामारी, त्वचा की समस्या, बहुत उच्च मानसिक तनाव, दुर्घटना का मूल कारक हैं
ज्योतिष शास्त्र में केतु को पाप ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में कई संकट आते हैं। आप कुछ साधारण उपाय करके केतु के अशुभ प्रभाव को कम कर सकते है।
☘️जानिए केतु उपायों के बारे में।☘️
1.दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिति को केतु के निमित्त व्रत रखें।
2.भैरवजी की उपासना करें। केले के पत्ते पर चावल का भोग लगाएं।
3. गाय के घी का दीपक प्रतिदिन शाम को जलाएं।
4. हरा रुमाल सदैव अपने साथ में रखें।
5. तिल के लड्डू सुहागिनों को खिलाएं और तिल का दान करें।
6. कन्याओं को रविवार के दिन मीठा दही और हलवा खिलाएं।
7. बरफी के चार टुकड़े बहते पानी में बहाएं।
8. कृष्ण पक्ष में प्रतिदिन शाम को एक दोने में पके हुए चावल लेकर उस पर मीठा दही डाल लें और काले तिल के कुछ दानों को रख दान करें। यह दोना पीपल के नीचे रखकर केतु दोष शांति के लिए प्रार्थना करें।
9. पीपल के वृक्ष के नीचे प्रतिदिन कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं।
10. दो रंग का कंबल किसी गरीब को दान करें।
☘️केतु ग्रह की शांति के उपाय☘️
केतु ग्रह की शांति के लिए ये उपाय शास्त्रों में बताए गए हैं।
1.केतु ग्रह की शांति करने के लिए जातक को सफेद रेशम के धागे को कंगन की तरह हाथ में बांधे।
2. जातक को किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल अपने घर में लाकर रखने से केतु ग्रह की शांति होती है।
3. केतु ग्रह को शांत करने के लिए लहसुनिया पहना चाहिए।
4. केतु को शांत करने के लिए जातक को काले, सलेटी रंगों का प्रयोग नही करना चाहिए।
5. 8 मुखी रुद्राक्ष या 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से केतु ग्रह की शांति होती है।
6. केतु ग्रह की शांति के लिए जातक को केतु संबधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।
7. केतु ग्रह की शांति के लिए जातक को ऊंचाई से गिरते हुए जल में स्नान करना चाहिए।
8. केतु ग्रह की शांति करने के लिए बृहस्पतिवार व्रत का उपवास रखना चाहिए एवं प्रतिदिन भगवान श्री गणेश जी की पूजा-अर्चना व् दर्शन करें।
9. केतु ग्रह की शांति के लिए जातक को तिल, जौ किसी श्री हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करना चाहिए।
10. केतु ग्रह की शांति करने के लिए जातक को अपने सिरहाने सोते समय अपने पास किसी पात्र में जल भर कर रखे और सुबह किसी पेड़ में डाल दे।